एक गुजरनेवाला

हर दूसरे दिन की तरा
अपने लाठीके चलते वो इस रस्ताको नापलेता हे
 हिलते पेरोमें आगे बढ़ता हे
 कापति उंगलियासे भारी वजन उठाता हे
 सफ़ेद बालोको लहराते हुए
 वो शख्स मेरे आखोके सामनेसे रोज गुजरता हे

Comments

Popular posts from this blog

Give a minute